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MMTeam » 7am - Nov 9, 2010

ex cm uttrakhand khandrui interviw by yashwant singh

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khanduri a politician of double face
written by Rajendra, March 01, 2011
भुवन चन्द्र खण्डूरी जी का व्यक्तित्व विरोधाभाषी है। वह जो दिखते हैं वह हैं नहीं और जो हैं वह दिखते नहीं। उनकी सबसे बड़ी योग्यता उनका ब्राहमण होना है। ब्राहमणवाद की नाव में बैठ क रवह कहां से कहां पहुंच गये। उनके लिये सभी दलों के ब्राहमण वोट देते हैं। उनकी छवि ऐसी बना दी गयी जैसे आज तक भारतीय राजनीति में ऐसा अवतार कभी पैदा ही न हुआ हो। लेकिन उनकी योग्यता तब छिपी नहीं रह सकी जबकि उनके नेतृत्व में भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव में सभी पांचों सीटें हार गयी। उनकी कार्यप्रणाली से उनेक ही दल के लोगों को पहले ही आभास हो गया था कि खण्डूड़ी भाजपा की लुटिया डुबो रहे हैं। लेकिन उनके परम्परागत प्रचार माध्यम और मीडिया के ब्राहमणों ने असलियत तब तक सामने नहीं आने दी जब तक कि चुनाव में भाण्डा फूट नहीं गया। उत्तराखण्ड की राजनीति में जातिवाद और क्षेत्रवाद फैलाने में खण्डूरी जी के लोगों की अहं भूमिका रही। उनको ये भाण्ड किस्म के भाईबन्धु बहुत ईमान्दर के रूप् में प्रोजेक्ट करते रहे। आज भी वही राग अलापे जा रहे हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि जो व्यक्ति सारंगी जैसा भ्रष्ट अफसर को अपने आस्तीन में रखता हो और जिसके हमसफर उमेश अग्रवाल जैसे लम्पट नेता हों वह ईमानदार कैसे हो सकता है। वह जब केन्द्र में मंत्री थे तो उनका मंत्रालय उस समय सबसे अधिक बदनाम था। सतेन्द्र दूबे काण्ड भी उसी समय हुआ। खण्डूरी जी गये तो फिर सब कुछ सामान्य हो गया। खण्डूरी जील ड़ने वाले जनरल कभी नहीं रहे मगर वह ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे न जाने उन्होंने कितने दुश्मन मारे हों और कितनी ही गोलियां खाई हों। वह अपने आप को इंजिनीयर कहलाने में भी सरमाते हैं। उस जमाने में उन्होंने 31 साल की उम्र में क्यों शादी की , यह भी सोचने का विषय है। जबकि उस समय 15 या 16 साल में ही ब्याह हो जाते थे।उनके बायोडाटा में यही लिखा है। कुल मिला कर देखा जाय तो वह बहुत अहंकारी और खुन्दकी नेता है। ऐसे नेता राजनीति में चलते नहीं मगर वह जाति के नाम पर चल रहे हैं और उनके जातिवादी पत्रकार उनका सिक्का अभी भी चला रहे हैं। जातिवाद उत्तराखण्ड के लिये सबसे बड़ा अभिशाप बन कर आ रहा है। जात के नाम पर अयोग्य लोग भी चुनाव जीत रहे हैं। खण्डूरी जैसे राजनीति के खिलाड़ी ठाकुरवाद, ब्राहमणवाद, कुमायूंवाद ,गढ़वालवाद ,मैदानवाद और पहाड़वाद के नाम पर समाज को बांट रहे हैं और योग्यता के बजाय इन वादों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। उत्तराखण्ड का मीडिया इन वादों को हवा दे रहा है। कई पत्रकार तो जातिवाद के कीचड़ में गले-गले तक धंस गये हैं। खण्डूड़ी जी उन सबको जानते हैं। क्योंकि वे उनके भी काम आते रहे हैं।
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written by himanshu, August 26, 2011
rajendra ji aapka article puri tarah se jatiwaad se prerit hai.........aap puri tarah se purwanumaan se garshit hain..so same on you.......you are not a good generlist,,,,,,kya aap bhul gaye khanduri ji ke raj main curruption pe kaise lagaam lag gayi thi...........nishan ke raaj main dekho kya ho raha hai ....aaj ki date main nishank pure india main sabse bharst cm hain
...........aur aap ke liye ek advice hai...ek patrkaar ko samalochak hona chaiye alochak nahi............

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